धर्म समाचार

गणेश जी को क्यों कहते है एकदंत जानिए पुरी कहानी

विघ्नहर्ता गणेश जी एकदंत कहे जाते है प्राचीन पुराणों में और इनसे जुडी पौराणिक कहानिया जानिए

धर्म समाचार:गणेशजी को एकदंत कहा जाता है आप ये तो जानते ही होंगे परन्तु उन्हें आखिर एक दंत क्यों कहा जाता है क्या यह आप जानते है आखिर क्या हो सकती है गणेश जी के एकदंत कहलाने के पीछे की वजह आइये जानते है | आपने गणेश जी के बारे में टीवी शो और कहनियो में फिल्मो में दिखाये गए कथाओ के माध्यम से गणेश जी से जुडी उनकी बाल लीलाओं और उनसे जुड़ी पौराणिक कहानिया सुनी होगी जिसका कोई अंत नहीं है | इसी दौर की एक कहानी ऐसी भी है जिसमे उनके एकदंत होने के बारे में बताया जाता है ।

गणेश जी को क्यों कहते है एकदंत जानिए पुरी कहानी

बहुत सरे ऐसे तथ्य मौजूद है जिनसे पता चलता है की भगवान गणेश जी को एकदंत कहने के पीछे आखिर राज क्या है-

1.महाभारत की रचना –

‘गणेश जी को क्यों कहते है एकदंत जानिए पुरी कहानी’ ऐसा मन जाता है की गणेश जी जब महभारत की प्रतियाँ लिख रहे तब उस समय के लिखने के लिए उपयोग में लाई जाने वाली कलम(पंख) लिखते लिखते खत्म हो गए | अब भगवान गणेश के पास और कोई रास्ता नही था तब उन्होंने अपने एक दंत को तोड़ कर उससे लिखना प्रारंभ कर दिया ,और आगे की कथा उससे ही पूरी की |इस कहानी से अंदाजा लगया जा सकता है की शयद यह वजह भी रही हो सकती है भगवान गणेश जी को एकदंत कहने की |

2.परशुराम जी ने तोडा दांत-

एक और पौराणिक कथा के अनुसार कहा जाता है की भगवान गणेश जी का एक दंत परशुराम जी ने क्रोध में आकर तोड़ दिया था आइये जानते है पूरी कहानी के बारे में दरासल बात कुछ ऐसी थी की एक बार भगवान शंकर जी अपने गृह स्थान कैलाश पर्वत में घोर तपस्या में खोये हुए थे और उन्होने गुफा के बहर भगवान गणेश जी को पहरा देने के लिए खड़ा कर रखा था और आदेश दिया था की कोई भी उन्हें परेशान न कर पाये | इस दौरान परशुराम जी भगवान शंकर जी से मिलने आते है तब गणेश जी उनका रास्ता रोकते है | और आप तो जानते ही है की परशुराम जी कितने गुस्से वाले थे उनके भगवान गणेश के द्वरा रास्ता रोके जाने पर उन्हें भयंकर क्रोध आया और अपनी परशु से उन्होंने गणेश जी की एक दांत काट दी |

3.गजमुखासुर को मरने के लिए –

‘गणेश जी को क्यों कहते है एकदंत जानिए पुरी कहानी’ एक और कहानी में कहा जाता है की गणेश जी के एकदंत होने की वजह उनका राक्षस गजमुखासुर के साथ होने वाले युद्ध है | असुर गजमुखासुर को ब्रम्हा जी ने वरदान  दिया था की उसे किसी भी अस्‍त्र-शस्‍त्र से नहीं मारा जा सकता और न ही हराया जा सकता था। असुर इस वरदान का अधिक लाभ उठाते हुए वह देवी – देवताओं और ऋषियों-मुनियों को सताने लगा। जब यह बात गणेश जी को  बताया गया तब उन्होंने उस  को युद्ध  के लिए ललकारा और अपना एक दांत को तोड़ कर उससे अस्त्र के रूप में प्रयोग कर उसका वध किया

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CGkesari Staff

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