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पूर्व कलेक्टर ओपी चौधरी ने थामा भाजपा का दामन भाजपा में हुए शामिल

छत्तीसगढ़ के 2005 बैच के आईएएस ओपी चौधरी रायगढ़ जिले के बायंग गांव के रहने वाले हैं। इस जिले से चयनित होने वाले वो पहले आईएएस अफसर हैं। 12 साल के कार्यकाल में उन्होंने छत्तीसगढ़ में ऐसी कई योजनाओं पर काम किया, जिसके लिए उनको राष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मानित किया गया। राजधानी स्थित प्रयास स्कूल को ओपी चौधरी का ही प्रयास माना जाता है। जहां नक्सल प्रभावित इलाकों के बच्चों को उच्च प्रतियोगी परीक्षाओं की पढ़ाई के साथ ही रहने की भी सुविधाएं दी जाती हैं। दंतेवाड़ा में कलेक्टर रहते हुए उन्होंने नक्सल प्रभावित इलाके को एजुकेशन हब में बदल दिया था

पूर्व कलेक्टर ओपी चौधरी ने थामा भाजपा का दामन,भाजपा में हुए शामिल

पूर्व कलेक्टर ओपी चौधरी ने थामा भाजपा का दामन,भाजपा में हुए शामिल ,माना जा रहा है की पूर्व कलेक्टर ओपी चौधरी रायगढ़ जिले की खरसिया सीट से चुनाव लड़ सकते हैं।  इस सीट पर लगभग 40 साल से भाजपा जीत दर्ज नहीं करा पाई है। छत्तीसगढ़ के राज्य घोषित होने के बाद से खरसिया विधानसभा सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहा है। खरसिया, कांग्रेस के दिवंगत नेता नंद कुमार पटेल की परम्परागत सीट रही। पिछले विधान सभा चुनाव के पहले 25 मई 2012 को बस्तर की झीरम घाटी में हुए नक्सली हमले में नंद कुमार पटेल का निधन हो गया था। जहां हुए उपचुनाव में उनके बेटे उमेश पटेल को प्रत्याशी बनाया गया था। उन्होंने इस सीट पर एकतरफा जीत हासिल की थी। और ऐसा अनुमान लगया जा रहा है की भाजपा को कड़ी मशक्कत करनी पड सकती है |

पूर्व कलेक्टर ओपी चौधरी ने थामा भाजपा का दामन,भाजपा में हुए शामिल
पूर्व कलेक्टर ओपी चौधरी ने थामा भाजपा का दामन,भाजपा में हुए शामिल

ओपी चौधरी के कलेक्टर बनने के बाद छत्तीसगढ़ राज्य के नौजवान उन्हें अपना आदर्श मानते हैं। इसका लाभ भाजपा सर्कार को मिल सकती है | पूर्व कलेक्टर ओपी चौधरी अपने बारे में खास बात चित में बताते है की जब वे..

”8 साल का था तब उनके पिता जी का निधन हो गया था । उनकी मां ने उनका पालन पोषण किया और पढने के लिए स्कूल भेजा। वो जिस स्कूल पढ़ते थे वह खपरैल वाला था जिस पर बरसात के समय पानी गिरता रहता था। तब मैंने लोगों के लिए सपना देखा। कलेक्टर बना और जितना कर सकता था उतना किया। कलेक्टर का पोस्ट खत्म हो रहा था और मंत्रालय की नौकरी शुरू होने वाली थी। मैंने जो लोगों के लिए सपना देखा था उसको पूरा करने में बंधन महसूस हो रहा था। लोकतांत्रिक व्यवस्था में चाहे राजनीति की कितनी भी आलोचना की जाए, लेकिन उसके व्यापक महत्व को स्वीकार करना पड़ेगा। इसी के जरिए समाज के निचले पायदान के लोगों के सपने को भी साकार किया जा सकता है।”

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CGkesari Staff

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